Tuesday, 14 August 2018

चराग़-ए-सेहर



ना जला हुआ ना बुझा हुआ मैं चराग़-ए-सेहर हुं थका हुआ जिसे पिछली रात जिला मिली जिसे ज़ुल्मतों की क़बा मिली जो वेहशतों से नहीं डरा !!
वो जुनैद पहरो-पहर लड़ा जिसे एक सबा ने बुझा दिया!

✍️..


जिला=light,Life ज़ुल्मत=Darkness क़बा=cloth जुनैद=warrior सबा= morning breeze


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