ख़ामोशियां ..
तन्हाईयां ..
रुसवाइयां ..
वो दिन... वो रात अब कहाँ,
वो सर्दी.. वो बरसात अब कहां
वो जज़्बे, वो ख़यालात.. अब कहाँ
वो जो हममें तुममें थी बात.. अब कहां
देर तक देखा था तुमको दूर तक जाते हुए
ख़ुश्क आँखों में सवालात अब कहाँ
आए हो मुझसे मिलने को, बैठो तुम
है वही कुर्सी.. वही खिड़की.. वही परदियांँ
इन दर-ओ-दीवार को यूँ न देखो तुम,
एक हब्स है इनके मेरे दरमियाँ..
मेरे ख़द-ओ-ख़ाल को यूँ न झाँको तुम,
ढल चुकी हैं सब रौनक़ें.. अब कहां
मुझसे मेरा हासिल कुछ न पूछो तुम,
तुम भी नज़रें मत चुराओ अब यहाँ
कुछ नहीं कहने को अब!
सुनने का कुछ भी दिल नहीं
हैं गुमशुदा सब रास्ते..
कोई भी मंज़िल नहीं
वो रब्त था कि जुनून था,
वो इश्क़ था या दिलकशी,
वो जो भी था,
वो मर चुका,
वो मरहला गुज़र चुका
कोई ख़्वाब थी वो ज़िंदगी,
सराब थी वो ज़िंदगी...
सब हो चुकी धुआँ धुआँ,
कुछ नहीं है अब यहाँ..
ख़ामोशियां ..
तन्हाईयां ..
रुसवाइयां ..
.......✍️ जुनैद
خاموشیاں۔۔
تنہائیاں۔۔
رسوائیاں۔۔
وہ دن... وہ رات اب کہاں،
وہ سردی.. وہ برسات اب کہاں
وہ جذبے، وہ خیالات.. اب کہاں
وہ جو ہم میں تم میں تھی بات.. اب کہاں
دیر تک دیکھا تھا تم کو دور تک جاتے ہوئے
خشک آنکھوں میں سوالات اب کہاں
آئے ہو مجھ سے ملنے کو، بیٹھو تم
ہے وہی کرسی.. وہی کھڑکی.. وہی پردیاں
ان در و دیوار کو یوں نہ دیکھو تم،
ایک حبس ہے ان کے میرے درمیان..
میرے خد و خال کو یوں نہ جھانکو تم،
ڈھل چکی ہیں سب رونقیں.. اب کہاں
مجھ سے میرا حاصل کچھ نہ پوچھو تم،
تم بھی نظریں مت چراؤ اب یہاں
کچھ نہیں کہنے کو اب!
سننے کا کچھ بھی دل نہیں
ہیں گمشدہ سب راستے..
کوئی بھی منزل نہیں
وہ ربط تھا کہ جنون تھا،
وہ عشق تھا یا دلکشی،
وہ جو بھی تھا،
وہ مر چکا،
وہ مرحلہ گزر چکا
کوئی خواب تھی وہ زندگی،
سراب تھی وہ زندگی...
سب ہو چکی دھواں دھواں،
کچھ نہیں ہے اب یہاں..
خاموشیاں۔۔
تنہائیاں۔۔
رسوائیاں۔۔

No comments:
Post a Comment